Tuesday, August 25, 2009

दक्षिणावर्ती शंख

वेद पुराणों के अनुसार समुन्द्र मंथन के समय दक्षिणावर्ती शंख की उत्पत्ति हुई जिसे भगवान विष्णु ने स्वयं अपने दाहिने हाथ में धारण कर रखा है। यह हर प्रकार की सुख सम्पति का दाता है। इसका मिलना बहुत ही दुर्लभ है। जिस घर में यह शंख होता है उस घर में अटूट लक्ष्मी निवास करती है। दक्षिणावर्ती शंख से सूर्य को जल देने से मानसिक, शारीरिक, और पारिवारिक कष्ट दूर होते है तथा मान सम्मान में वृद्धि होती है। इसे पूजा स्थान पर रखकर पूजा करने से लक्ष्मी प्रसन्न होती है।

Monday, August 10, 2009

विष्णु सहस्त्रनाम के द्वारा कष्टों का उपचार

विष्णु सहत्रनाम महाशक्तिशाली स्तोत्र है। विष्णु सहस्त्रनाम के १०८ श्लोकों का पाठ करने से सभी प्रकार के ग्रह दोषों और कष्टों का निराकरण हो कर परम शान्ति प्राप्त होती है। अश्विनी नक्षत्र से रेवती नक्षत्र तक २७ नक्षत्र होते हैं। प्रत्येक नक्षत्र में चार चरण होते हैं। इस प्रकार २७ * ४ = १०८ हुए। अश्विनी नक्षत्र के प्रथम चरण में जन्मे जातक को प्रथम श्लोक का पाठ करना चाहिए। भरणी नक्षत्र के प्रथम चरण में जन्मे जातक को पंचम श्लोक का पाठ करना चाहिए। इस प्रकार क्रमशः प्रत्येक व्यक्ति सम्बंधित नक्षत्र शान्ति के लिए पाठ करें। जिसे अपने नक्षत्र का ज्ञान ना हो, वह सम्पूर्ण विष्णु सहस्त्रनाम स्तोत्र का पाठ करें।

Saturday, August 08, 2009

नागकेसर

यह बहुत ही पवित्र और उर्जा दायक वनस्पति है। भगवानशिव को प्रसन्न करने के लिए इससे बेहतर चढावा नही है। जो कोई शिवरात्री को भगवान् शिव पर नागकेसर चढाता है, उसका संपूर्ण वर्ष अच्छा निकलता है।

व्यापार बढ़ाने के लिए कुछ टोटके

गोमती चक्र लक्ष्मी का स्वरुप है। ११ गोमती चक्र एक लाल पोटली में बाँध कर दूकान में रखने से व्यापार अच्छा चलेगा।

प्रमोशन के लिए टोटका


प्रमोशन के लिए प्रत्येक सोमवार को शिवजी पर एक गोमती चक्र चढाये।

हार्पीज त्वचा रोग

हार्पीज से पीड़ित त्वचा पर ग्वार पाठे के गुदे को लगाने से पीड़ा कम होगी और २-४ दिनों में रोग जाता रहेगा।

Monday, August 03, 2009

पुण्य व स्वास्थय प्रदाता आंवला

पद्मा पुराण के एक प्रसंग में भगवान् शंकर कार्तिकेय से कहते हैं : " बेटा ! आंवले का फल परम पवित्र है। यह भगवान् विष्णु को प्रसन्न करनेवाला एवं शुभ माना गया है।
आंवला खाने से आयु बढती है।
इसका रस पीने से धर्म का संचय होता है और रस को शरीर पर लगा कर स्नान करने से दरिद्रता दूर होकर एश्वर्य की प्राप्ति होती है।
जिस घर में आंवला सदा मौजूद रहता है, वहां दैत्य और राक्षश कभी नही आते।
जो दोनों पक्षों की एकादशियों को आंवले का रस प्रयोग कर स्नानं करते हैं, उनके पाप नष्ट हो जाते हैं। आंवले के दर्शन, स्पर्श तथा नाम उच्चारण से भगवान् विष्णु संतुष्ट हो कर अनुकूल हो जाते हैं। अतः अपने घर में आंवला अवश्य रखना चाहिए।
जो भगवान् विष्णु को आंवले का बना मुरब्बा एवं नैवेध्य अर्पण करता है, उस पर वे बहुत संतुष्ट होते हैं।
आंवले का सेवन करने वाले मनुष्यों की उत्तम गति होती है।
रविवार, विशेषतः सप्तमी को आंवले का फल त्याग देना चाहिए।
शुक्रवार, प्रतिपदा, सस्ठी, नवमी, अमावस्या और संक्रांति को आंवले का सेवन नही करना चाहिए।